जब याद मेरी आएगी...
By Keyur Joshi
जब फांसले होंगे कुछ ज़्यादा,
ये दूरी जब आसमाँ छुएगी,
कोई अरसा शायद ऐसा भी हो के इस दूरी और आग़ोशी के खेल में तुम हारता हुआ पाओगी खुदको...
तब एक दफा, बस एक दफा मुझे याद कर लेना तुम, के जब याद करोगी तो बस मुझे अपनी ओर देख कर बस हँसता हुआ पाओगी तुम...
सुनो, ज़रा मुस्कुरा देना तुम भी जवाब में या फिर इस ज़माने से रूठकर तुम अपनी बेबाक़ हँसी हँस देना एक बार,
के तुम्हें जब याद मेरी आएगी...
ये मौसम भी तो मिजाज़ी है, बिल्कुल तुम्हारी तरह...
ये बादल भी ज़रा ज़िद्दी है के बरसेंगे कभी भी बिल्कुल टूट कर इस ज़मीं के आग़ोश में और बयाँ कर देंगे अपने दिल के वो सारे राज़ जो न जाने दिल में कब से दबे थे, बिल्कुल तुम्हारी तरह...
अब ज़रा अपनी आँखें मूँद दो तुम..
क्या सुन पा रही हो उन बूँदों की खुशी भरी सदाएँ ?
जैसे किसी मेले में बिछड़ी हुई एक नन्ही सी जान को अपनी माँ उसी भीड़ में दिख जाए...
मिट्टी की ख़ुशबू भी तो कह रही है के ज़रा करीब तो आओ, के देना है तुम्हे भी किसी का पैगाम जो बैठा है कहीं दूर, बस तुम्हारी तरह...
अब सुनो, खुदको बहा देना तुम उन बूँदों में कही, के मिट्टी बनकर मैं राह देख रहा हूँ..
बन जाना बूँदे तुम,
के तुम्हें जब याद मेरी आएगी...
फिर एक दिन हवा अपना रुख़ बदलेगी
जब सर्द नसीमें मेरा एहसास फिर दिलाएंगी,
तब अपनी बिखरी ज़ुल्फ़ों को सवार लेना एक बार,
के तुम्हें जब याद मेरी आएगी...
जब एक अरसा यह इश्क़ बयाँ करेगा
तुम्हें जब आँखों में नमी महसूस होगी,
तब उन बहते अश्क़ों में मेरा वजूद ढूँढ लेना तुम,
के तुम्हें जब याद मेरी आएगी...
By Keyur Joshi

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