top of page

जब पुरुष प्रेम करता है

By Deependra Srivastava


मै अपना मोक्ष तुमको सौपकर

अपनी मुक्ति से वंचित रह सकता हूँ

मै तुम्हारे वगैर भी तुमसे इश्क कर सकता हूँ

84 लाख योनियों मे भटकने फिर निकल सकता हूँ

मै अपना मोक्ष तुमको सौपकर

अपनी मुक्ति से वंचित रह सकता हूँ


हूँ समर्पित तुम्हारे व्यक्तित्व किरदार और रूह पे

मै तुम्हारे लिए शरीर का मोह भी छोड़ सकता हूँ

और मै अपना मोक्ष तुमको सौपकर

अपनी मुक्ति से वंचित रह सकता हूँ


मै दूरियों मे भी उतना ही करीब तुम्हारे रह सकता हूँ

जितना पास रहकर तुम्हारा हूँ

मै कृष्ण तो नहीं

पर मै तुम्हारे लिए इंसान बन सकता हूँ

और मै अपना मोक्ष तुमको सौपकर

अपनी मुक्ति से वंचित रह सकता हूँ


By Deependra Srivastava


Recent Posts

See All
एकतरफ़ा इश्क़ का अंजाम

By Vansh Sahni जब इश्क़ में थे मशरूफ़, तो लगा था रिश्ते की हर चुनौती होगी पार,  नहीं आएगी इस रिश्ते के बीच में दरार।  सोच लिया था मैंने, upto too far।   यह इश्क़ की हिफ़ाज़त में, बड़े कायदे से बोलने ल

 
 
 
आदत

By Vansh Sahni  गम नहीं है मुझको अब तुम्हें न पाने का,  कुछ कहे बिना बस यूँ ही चले जाने का।  गलती तो मेरी थी, जो वादा कर बैठा था मैं, तुम्हें खुद से भी ज़्यादा चाहने का।  यादों में है मेरे, तुम्हारा य

 
 
 
रहस्यमय बैग

By Vansh Sahni टहलते हुए दो  बहनें शीत ऋतु के दौरान पहुँच जाती हैं एक जगह जहाँ सामने था मैदान  वहाँ हर्षो उल्लास के साथ खेल रहे थे कई सारे नन्ही सी जान कुछ मिलों दूर दिखता है उन्हें एक बैग पुराना  जो 

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page