जब पुरुष प्रेम करता है
- Hashtag Kalakar
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By Deependra Srivastava
मै अपना मोक्ष तुमको सौपकर
अपनी मुक्ति से वंचित रह सकता हूँ
मै तुम्हारे वगैर भी तुमसे इश्क कर सकता हूँ
84 लाख योनियों मे भटकने फिर निकल सकता हूँ
मै अपना मोक्ष तुमको सौपकर
अपनी मुक्ति से वंचित रह सकता हूँ
हूँ समर्पित तुम्हारे व्यक्तित्व किरदार और रूह पे
मै तुम्हारे लिए शरीर का मोह भी छोड़ सकता हूँ
और मै अपना मोक्ष तुमको सौपकर
अपनी मुक्ति से वंचित रह सकता हूँ
मै दूरियों मे भी उतना ही करीब तुम्हारे रह सकता हूँ
जितना पास रहकर तुम्हारा हूँ
मै कृष्ण तो नहीं
पर मै तुम्हारे लिए इंसान बन सकता हूँ
और मै अपना मोक्ष तुमको सौपकर
अपनी मुक्ति से वंचित रह सकता हूँ
By Deependra Srivastava

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