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जब जब तेरी याद

Mar 4, 2023
5 min read

By Anshul Sharma


जब जब तेरी याद में आँसू गिरे किताब पर तेरी

तस्वीर बन गई,

जब से तुझे चाहा है बस अब तू ही मेरी तकदीर

बन गई

तुझ से बिछड़ने का दर्द अभी भरा भी नहीं था,

तेरी आखिरी मुलाक़ात की याद फिर से ज़ख्म

गहरा कर गई

मैं लिखना कभी चाहता नहीं था,

पर आज यह कलम पन्नों पर खुद ब खुद चल गई

अपने दिल-ए-नादान की क्या कहानी सुनाऊं

तुमको अब,

मेरी कहानी खुद आग में जलकर, तेरा घर रोशन

कर गयी

आज मैं भी जा रहा हूँ मैखाने में,

कुछ वक़्त के लिये अपने सारे गमौ को भूलाने, शायद फिर से तेरी यादों को कब्र में दफनाने,

क्या पता मेरी आज तुझे भूलाने की यह कोशिश मुकम्मल हो जाए,

शुरू जहाँ से हुई थी यह हमारे सफर की कहानी,

आज मेरे साथ ही यह भी कब्र में दफन हो जाए

2022-01-19

कभी दिन भर बातें किया करता था तुमसे ।

क्या ? अब मुझ पर ये खामोशी बखुबी जचती है

किये थे जिंदगी भर साथ के वादे

क्या ? उन वादो की अहमीयत अब भी है

तुम जुदा हो कर जिंदा कैसे हो आज भी

क्या ? साथ जीने मरने की खाई कसमे इतनी

सस्ती है

कभी हर दुआ में मांगता था तुझे

ये क्या ? अब इन लबों पर तेरी ख़ातिर बदुआ

वसती है

2022-01-19

पिता वो होता है.........!

जो खुद को लाखों काँटों में रखकर भी मुस्कुराता

है पर अपने बच्चों को दर्द जाया नहीं होने देता,

वो होता है पिता........

जो जिंदगी के बोझ तले दबा रहता है मगर फिर

भी उफ तक नहीं करता,

वो होता है पिता........

जो खुद के आँसू छुपा कर अपने परिवार के आँसू

पौंछता हैं

वो होता है पिता.......

जो हमारी हर ख़्वाहिश को जी जान से पूरा करने

की कोशिश करता है

वो होता है पिता........

जो लाखों के कर्जे के नीचे दबे होने के बावजूद भी

यह कहता है तू कर बेटा, करता रह अपनी आखिरी कोशिश तक मैं खड़ा हूँ तेरे साथ,

वो होता है पिता.......

जो हमारे छोटे से छोटे सपनों को पूरा करने के

लिए अपनी सारी जमा पूँजी लगा देता है फिर भी

कहता है तू कर,

वह होता है पिता.........

माना कभी सख्त कभी गुस्से में नरम रहता है

अपने दर्द में भी अपने आँसू छुपाता है

चाहे जेब खाली हो खुद की फिर भी हमारी हर

बात को मानता है

वो होता है पिता........

अब मैं क्या ही लिखूं अंशुल उस सख्स के लिए,

जिसको जाया करने के लिए कोई शब्द बना ही

नहीं, क्योंकि ना ही कभी किसी कलम में हिम्मत

हुई,

कि उसकी मेहरबानियों को इन कागजों पर जाया

कर सकें

और

हर घड़ी में अपने परिवार के सर का ताज होता है

पिता,

वो होता है पिता........!



2022-01-19

कुछ तारीफे उस माँ के नाम की भी होनी

चाहिए....!

जिसने सब की ख़्वाहिश को पूरा किया,

अपनी ख़्वाहिशौ को दिल में दबये रखा।

वो सब के दर्द को अपने साथ बाटती रही,

पर अपने दर्द को अंदर ही सजौए रखा।

जिसने अपनी पूरी जिंदगी परदे में गुजरी,

उसने अपनी बेटियों को परदे में ना रहने के लिए

लडना सिखा दिया।

एक माँ ही तो है जिसने बिना मतलब के सब कुछ

करना सिखा दिया..!

2022-01-19

क्या मौहब्बत सच में खत्म हो जाती है......?

क्या खत्म हो जाती है किसी एक के ना चाहने

से...

क्या खत्म हो जाती है किसी एक के दूर चले जाने

से..

वो कसमे वो वादे क्यूँ उन फासलो में दफ़न हो

जाते हैं

क्या दिल के रिश्ते यूँही खत्म हो जाते हैं

क्या आज भी तुम्हें उसकी याद आ जाती है

क्या मौहब्बत सच में खत्म हो जाती है......?

मौहब्बत न करो क्यूँ दुनियां को तुम ये सिखाते

हो..

मौहब्बत आज भी है तुम्हें, बस अपने आप से क्यूँ छुपाते हो...

क्यों अपने आप को बेगुनाह और उसको गुनाहगार बताते हो..

क्यों उसकी पसंद की रंगबिरंगी चादर कफन हो

जाती है..

क्या मौहब्बत सच में खत्म हो जाती है......?

अगर मौहब्बत ख़त्म ही हो गई है तो क्यू सोने से

पहले उसे याद करते हो,

जाने अंजाने में ही सही क्यों उसकी एक झलक

देखने के लिए रब्ब से फरियाद करते हो,

क्यों उसकी बातें करते ही तुम्हारी आंखें नम सी हो

जाती है

क्या मौहब्बत सच में खत्म हो जाती है......?

2022-01-19

मुझे अब नींद की तलाश नहीं हैं, मुझे रातों में जागना अच्छा लगता है।

मलुम नहीं की वो मेरी क़िस्मत में है या नहीं,

मगर खुदा से उसे माँगना अच्छा लगता है

पता नहीं मेरा उस पर हक है या नहीं,

पर मुझे उसकी परवाह करना अच्छा लगता है।

उसे चाहना सही है या गलत पर,

इस एहसास में जीना अच्छा लगता है।

ना जाने हमारा साथ होंगे या नहीं पर,

यूही तेरा साथ होने का ख़्वाब देखना अच्छा लगता

है।

वो मेरी हो या ना हो पर उसे,

अपना कहना अच्छा लगता है

2022-01-19

अब साल के कुछ आख़िरी दिन रह गया,

जैसे चाय का प्याला आधा रह गया।

किसी ने कुछ खोया किसी ने कुछ पाया,

यूही सर्द हवा में ये पुरा शहर रह गया

मस्त मगन सा वो इश्क अधूरा रह गया,

ना जाने कहीं तू रह गयी कही मैं रह गया

कुछ ने हम को छोड़ा कुछ को हमने छोड़ा,

अब ये मेरा नया सा रूप रह गया।

जैसे किताब का वो पन्ना ही खुला रह गया,

जिसे पढ़ना था वो पता नी कहाँ रह गया

अब यहाँ कौन ही जाने क्या रह गया,

सुबह उठा तो पता चला साल का आखिरी दिन रह

गया

2022-01-19

तेरा हर गम तुझसे छीन कर कही दूर तुझसे ले

जाँऊ,

जहाँ गमो का है मेला वहाँ उन गमो को मै भूल

आँऊ।

तेरे जिस जख्म पर दवा असर ना करे,

क्यों ना मै मरहम बन तेरा हर जख्म भर आँऊ

तु रोए जब-जब मेरी यादो मे,

मै अश्क़ बन तेरी आँखों से बरस जाँऊ ।

इस जन्म मे तो ना दे सका..,

शायद..! अगले जन्म मे खुशियाँ तुझे दे पाँऊ

2022-01-19

बस एक गहरी ख़ामोशी ही तो हूँ मै,

आखिर मै खुद को आवाज़ बनाँऊ तो कैसे।

शोर भरी दुनिया में अपना कौन समझेगा यहाँ,

सबकी अपनी दलीले हैं मे दर्द समझाऊँ तो कैसे।

उसने तो अल्फाज़ो में दर्द जाया कर दिया,

मै अपने अश्को के कतरो को बहाऊँ तो कैसे।

सुनना सुनाना तो अब भ्रम है जीवन का,

अंतर् मन की कहानी किसी को बताऊँ तो कैसे।

2022-01-19

लाल रंग

लड़की के लाल रंग से तुम क्यों डरते हो

वो तो हर लड़की के सुख - दुःख की साथी है

वक़्त - बेवक़्त हर महीने चली आती है

थोड़ा दर्द थोड़ा झल्लाहट ले आती है

मनुष्य तुम अपनी कमजोरिया दिखाते हो उसको ऐसे कैसे अपवित्र बताते हो

वो तो तेरे इस वजूद का कारण है

उसके बिना श्रृष्टि की रचना भी अधूरी है तो इस लाल रंग से क्यों भेद करे

उन दिनों में उनका साथ बने

ये तुम्हारा वहम है की ईश्वर को ये लाल रंग

स्वीकार नहीं अगर स्वीकार ना है तो ये तेरा तप भी

उसको स्वीकार नहीं

2022-01-19


By Anshul Sharma




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