जब खुद से मेरी मुलाकात हुई
- Hashtag Kalakar
- Dec 10, 2025
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By Monika Parvanda
किसी से जो मैं ना कह पायी,
आज हर वो बात हुई,
कई अनकहे एहसास निकले उभर कर बाहर
जब खुद से मेरी मुलाकात हुई।
कुछ प्यार भरी यादें आई सामने,
वहीं, कुछ यादों से आँखों में बौछार हुई,
जिंदगी का हर लम्हा हुआ डिस्कस,
जब खुद से मेरी मुलाकात हुई।
कुछ डर कुछ घबराहटों का चला सिलसिला,
शर्म के उठे जब पर्दे , खुलकर तब शुरुआत हुई,
मैं हूँ तेरे साथ , मैने दिलाया यकीन,
जब खुद से मेरी मुलाकात हुई।
तू रुक, तू ठहर,
तू बोल, तू डर मत, रख आज वो हर भाव समक्ष,
जिसे जानते हुए भी, तू अज्ञात हुई,
हल्का किया मैने अंतरमन को ,
जब आज खुद से मेरी मुलाकात हुई।
पहचाना अपने सामर्थय को आज मैने,
ये कैसी वारदात अकस्मात हुई,
स्वयं से किया मैने हंसने का वादा,
जब खुद से मेरी मुलाकात हुई।
जा दिखा दे दुनिया को कौन है तू,
आज से तेरे संग ये सारी कायनात हुई,
बना दिया मैने खुद को अटूट ,
जब खुद से मेरी मुलाकात हुई।
कोई और साथ दे न दे, मैं हूँ तेरे संग खड़ी,
आज मैं स्वयं के लिये पर्याप्त हुई,
मिली मुझे हमेशा साथ देने वाली एक , सहेली,
जब खुद से मेरी मुलाकात हुई।
By Monika Parvanda

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