जब कहानी लिखनी थी,मैंने कविता लिखी!
By Tulsi Chhetry
अनगिनत किस्से
जब बिना सिरे के लिपट जाते
मैंने कविता लिखी
यार कवि! तुम्हें तो तब कहानी लिखनी थी
हां, लिखनी तो कहानी ही थी
जहां मुझे गंगा में बहती लाश
को मुक्ति देनी थी,
वहां मैंने कविता में 'मोक्ष' लिख दिया
ओह!
अब तुम्हारी गलती का खामियाजा
गंगा को भुगतना होगा!
ऐसा करो तुम पुनः लिखो
इस बार कहानी लिखना,
लिखना, कैसे उस अल्हड़ लड़की ने अहाते में
नीला, पीला सतरंगी इंद्रधनुष उगाया था
लिखना, कैसे नारियल की सींख से बने झाड़ू को फिरा
एक औरत ने उसी इंद्रधनुष को धूल चटा दी
फिर लिखना
लड़की से औरत होने के ध्रुवीय सत्य को,
इस तरह धीमे से
लड़की के लड़खडाते इंद्रधनुष को बैसाखी थमा देना
उसके स्वप्नों की पीठ से औरत होने के दाग मिटा देना
तुम्हारी कहानी के अंत तक किसी को खबर न हो
की तुमने गंगा में बहती लाश को मुक्ति नहीं दी।
इस तरह तुम लड़की के पंखों को
औरत की डिबिया से चुरा कर सुई धागा दे आना।
By Tulsi Chhetry

Very Impressive writing! The writer has a unique way of conveying the thoughts!