जननी जब विध्वंस करेगी
By Tanu Saini
ललकारा हैतुमने काली को, महायद्ुध आरंभ तो होगा ही
हुआ यदि मााँ सीता का हरण, रावण का हनन तो होगा ही
जब ककया याज्ञसेनी का अपमान, कौरवों ने िंड तो भोगा ही
जननी जब ववध्वंस करेगी, प्रलय प्रचंड तो होगा ही।
पूजोगे यदि लक्ष्मी रूप उसका, सुख अनतं तो होगा ही
जो धर ललया शक्तत रूप उसने, मदहषासुर का अंत तो होगा ही
सुलमरोगे लशव नाम तुम, भवानी का मनन तो होगा ही
जननी जब ववध्वंस करेगी, प्रलय प्रचंड तो होगा ही।
थाम ली यदि तलवार उसने, कालचक्र मंि तो होगा ही
भूलम हैयह क्षत्राणणयों की, रतत पर घमंड तो होगा ही
आहुतत िी पद्मावती ने स्वयं की, बललिान अमर तो होगा ही
जननी जब ववध्वंस करेगी, प्रलय प्रचंड तो होगा ही।
रही मललन मानलसकता यदि, नारी का िमन तो होगा ही
पर मौन न रहेगी वह, प्रताड़ना पर क्रं िन अब होगा नहीं
पववत सम दृढ़ शील, आत्मसम्मान अखंड तो होगा ही
जननी जब ववध्वंस करेगी, प्रलय प्रचंड तो होगा ही।
लोगे परीक्षा अक्नन की तुम, अलभमान भस्म तो होगा ही
भूलो न तुम समपवण उसका, उस बबन सजृ न होगा नहीं
होता रहा यदि शोषण धरा का, जीवन का अंत तो होगा ही
जननी जब ववध्वंस करेगी, प्रलय प्रचंड तो होगा ही।
By Tanu Saini

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