ज़िंदगी
By Manu Sharma
ज़िंदगी, नाम है मौत की हसीन साजिश का
जिसका आगाज, पहली सांस
और अंजाम, हर सांस
हर सांस जो हर पल से जुड़ी होती है
तुम्ही बताओ, ज़िंदगी कहां पल से बड़ी होती है?
और पल होता है इतना विराट, इतना व्यापक
की तुम पल की गहराई में जाओगे, तो एक सदी को पाओगे
सदी, जिसका संबंध है सालों से
साल, जो महीनों से जुड़े हैं
महीने, तीस भी दिन के, तो कभी 31 भी दिन के
लेकिन दिन तय होता है, वो है चौबीस घंटो का
पहर घंटो से बनते हैं, जो की आठ होते हैं
मिनट सेकंड में बदलो, तो वो भी साठ होते हैं
ढेरो पल छुपे सेकंड में, पल को समझ ले जो
सलीके से अगर पल के लिए जीवन को जी ले जो,
जीना, उसी का नाम है।
By Manu Sharma

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