ज़रूरी तो नहीं
By Sarsij Mishra
हर नम आँखें गम बयान करें,
ज़रूरी तो नहीं।
हर मुस्कुराता शक्स खुश हो,
ज़रूरी तो नहीं।
नहीं ज़रूरी की दिल ही टूटा हो,
सिर्फ टूटे दिल में ही दर्द हो,
ज़रूरी तो नहीं ।
दिल टूटा हो जिसका वो ही सिर्फ शायर हो,
ज़रूरी तो नहीं।
बात धोखे की हो तो बस इश्क में,
ज़रूरी तो नहीं।
नहीं ज़रूरी कि रोने वाला ही धोखा खाता है,
दिल तोड़ने वाला ही हर दफा धोखेबाज हो,
ज़रूरी तो नहीं।
चिखली – गुस्साती – रोती औरत झगड़ालू हो,
ज़रूरी तो नहीं।
गहनों से सजी – दुल्हन सी दिखने वाली खुश हो,
ज़रूरी तो नहीं ।
नहीं जरूरी कि उसकी जिंदगी हसीन हो,
हर सफेद पोशाक मर्द नेक हो ,
ज़रूरी तो नहीं।
हर बेटी का घर सास बिगाड़े ,
ज़रूरी तो नहीं।
उसकी हर बात ताना और लड़ाई हो,
ज़रूरी तो नहीं ।
नहीं ज़रूरी की बहू बेचारी ही रही हो,
हर खूबसूरत चेहरा मासूम दिल हो,
ज़रूरी तो नहीं ।
By Sarsij Mishra

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