छोड़ देता है मुझे (Chorr Deta Hai Mujhe)
By Sameer Agarwal
कुछ ऐसा फलसफा है अपनी जिंदगानी का,
जिसे भी टूट कर चाहता हूं छोड़ देता है मुझे।
हर किसी पर यूं तो मैं एतबार नहीं करता,
और जिसे दिल की बात बताता हूं छोड़ देता है मुझे।
यूं तो हर किसी को हंसाना फितरत रही है मेरी,
और जिस भी रूठे को मनाता हूं छोड़ देता है मुझे।
यूं तो मैं तारीफें अकसर करता नहीं हूं अपनी,
और जब किसी को किस्से सुनाता हूं छोड़ देता है मुझे।
दिल्लगी का सिला जिंदगी में कुछ ऐसा मैंने पाया है,
जिससे भी दिल लगाता हूं छोड़ देता है मुझे।
तनहाई को मेरा साथ कुछ इस तरह से रास आया है,
जब भी किसी को बुलाता हूं छोड़ देता है मुझे।
By Sameer Agarwal

Comments