छूट गए सब लोग पुराने
By Mohd Shakeb ("Shauk-E-Shakeb")
छूट गए सब लोग पुराने,
एक साइकिल पर तीन यार पुराने।
संध्या काल में दरवाजे पर खट-खट की कहानियां,
बिन मतलब यारों वाली सैर सपाटे की मनमानी पुरानी।
बिन मिसकॉल, बिन मैसेज, बिन लोकेशन एकजुट हो जाना,
हर एक छोटी कामयाबी पर वो कटिंग चाय की बड़ी पार्टी पुरानी।
कहां आ गए हम, कहां रह गए वो जमाने,
जिंदगी की आपाधापी में छूट गए सब लोग पुराने।
By Mohd Shakeb ("Shauk-E-Shakeb")

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