चुप्पी
By Alka singh
मैं भी कुछ कहना चाहती हूं,
बस अपनी खामोशी तोड़ना चाहती हूं,
“लड़की हो, ज्यादा मत बोलो,
छोटी हो, मुंह मत खोलो”
बस यही सुनकर तो बड़ी हुई हूँ।
सोचा, जब बड़ी हो जाऊंगी
तो अपनी बातें कह पाऊँगी।
“कितना बोलती हो, शर्म नहीं है?
आदमी की बात मानने में
हर्ज़ नही है”
ये कहकर मुझे फिर छोटा कर दिया गया।
By Alka singh

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