चिड़ियों का दाना-पानी
By Mr. Anil kumar mandal
अब चिड़ियों का दाना-पानी,
इंसा के घर छूट गया।
पहले हमसे तितली रूठी,
अब गौरैया रूठ गया।
कुछ तो असीर बने हैं ऐसे,
पर ही मानो टूट गया।
जिसको गुलामी रास न आई,
पिंजरे में ही छूट गया।
कितना निर्दय है ये मानव,
मानव तक को लूट गया।
तेरी क्या औकात रे चिड़िया,
अपना खू तक लूट गया
अब चिड़ियों का दाना-पानी,
इंसा के घर छूट गया।
पहले हमसे तितली रूठी,
अब गौरैया रूठ गया।
कब कितना गिर जाए इंसा,
मर्यादा सब टूट गया।
सबसे गहरा धन का रिश्ता,
जिसमें मानव लूट गया।
क्षमा, दया,करुणा भी खोयी,
ये मानव तन झूठ गया।
कुदरत की अद्भूत रचना में,
लोभ पाप का घूट गया।
अब चिड़ियों का दाना- पानी,
इंसा के घर छूट गया।
पहले हमसे तितली रूठी,
अब गौरैया रूठ गया।
By Mr. Anil kumar mandal

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