चिड़िया का नाम
By Abdul Basit Kudalkar
सुना है ढाई अक्षर पे
टिका है इस जग का भार
जिसके चक्कर में बने भी
बिखरे भी कई संसार
देश, वेष, भाषा बदले
भले बीत गए युग चार
इसके चर्चे फ़िर भी न रुके
जिसमें डूबे कोई होए पार
जो करते हैं इसका इज़हार
उन्हें बदले में मिले इनकार
फ़िर भी उम्मीद न हारे वे
करते किसी और से नैन चार
ये कैसी लड़ाई है जिसमें जीते
जो जाए इसमें सब कुछ हार
किसी ने सुलझाई हो ये पहेली
तो बतलाओ हमें भी यार
ये प्यार है आख़िर किस चिड़िया का नाम
बेपरवाह जो लेती हमेशा लंबी उड़ान
ये प्यार है आख़िर किस चिड़िया का नाम
By Abdul Basit Kudalkar

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