चाँद ने कहा तारे से:
By Aaishpreet Bajaj
“ज़रा देख कर आना,
कि वो कौन है जो मुझे चुपके से नूर दे जाता है,
मै देख नहीं पाती
वो मेरी नज़रों से छिप जाता है।
यूँ तो ईबादत करता है पूरा जहान
मगर वो कौन है जो बिना ग़ज़ल के अपना इश्क़ बयाँ कर जाता है।”
तारा गया सूरज के पास;
“आज फिरसे पैगाम आया है,
चाँद ने तुम्हारा ज़िक्र दोहराया है।
उसे भी मोहब्बत है तुमसे
ये तारा तुम्हारा नाम जानने आया है।”
सूरज का जवाब:
“चाँद को देखा नही है मैंने
मेरे दिल मे उसकी तस्वीर है।
उसे बेखबर ही रहने दो
इन फ़ासलों का होना ज़रूरी है।
नज़रें आबरू हुई अगर,
तो चाँद का नूर खो जाएगा।
करीब आने पर उसके दाघों को,
ये ज़माना पहचान जाएगा।
उसे आज़ाद रहने दो रातों में,
मेरे उजालों में वो बंध जाएगा।
अमानत है वो इस जहान की,
मेरा वो कभी हो नही पाएगा।
उसे पाने की ख्वाहिश नही है मेरी।
मैंने पाया उसे अगर,
तो वो हमेशा के लिए खो जाएगा।”
By Aaishpreet Bajaj

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❤️
So beautiful
Very nice poetry