चलो चलें उस पार चलें हम
Updated: Jul 28, 2025
By Deepak Mananda
चलो चलें उस पार चलें हम, जहाँ न कोई पास रहे।
मैं और तुम बस पास रहें, हाथों में हाथ को थाम रहें,
दूर तलक हो हरी वादियाँ, नभ नीले निहार रहें।
फूलों की घाटी हंसे जहाँ, पंछी आजाद जहाँ विचरें,
झूमे मस्ती में हवा जहाँ, प्रकृति का सान्निध्य रहे।।
चलो चलें उस पार चलें हम, जहाँ न कोई पास रहे।
झरने का मीठा स्वर गूंजे, दरिया का कल कल नाद रहे,
किरण की आभा में चमके, पानी का अलग अंदाज रहे।
डोले डाली मस्ती में झूले, कलरव गीत जहाँ गूंजे,
मिलन हमारा बाधारहित, संगम में डूबा साथ रहे।।
चलो चलें उस पार चलें हम, जहाँ न कोई पास रहे।
सेज हरी हो घासों की, माहौल में खुशबू छाई रहे,
तितली चमकीली फूलों पर, कोयल की कूक सुनाई पड़े।
भँवरे की गुंजन अलख जहाँ, पत्तों का नृत्य जहाँ न रुके,
यैश मधुर स्वर धीमा पहुंचे, स्व अस्तित्व का ज्ञान रहे।।
चलो चलें उस पार चलें हम, जहाँ न कोई पास रहे।
लताएँ पेड़ों पर लटकी, मानो अजीब आगोश रहे,
सटी डारियाँ गुथीं परस्पर, संघ बना सम्मान रखें।
जहाँ कोई न उपद्रव हो, शान्ति का संग वास रहे,
विविध रंग में विविध प्रजाति, एक सूत्र में साथ रहें।।
चलो चलें उस पार चलें हम, जहाँ न कोई पास रहे।
जहाँ परम हो हर पल में हम, ध्वनि अखण्ड का जाप करें,
यह मन प्रियतम को पा ले बस, यही अधूरी प्यास रहे।
परमेश्वर का पुत्र होऊँ मैं, शाश्वतता का सूत्र होऊँ,
तुम हो जाओ सच्चित् आनन्द, बची न कोई आश रहे।।
चलो चलें उस पार चलें हम , जहाँ न कोई पास रहे।
By Deepak Mananda

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