चली भी आओ
By Rathod Aakash
चली भी आओ
चली भी आओ कि अब रहा नहीं जाता है
साहस तो बहुत है पर कहा नहीं जाता है
मालूम है मुझे कुछ मजबूरियों के मारे तुम भी हो
तो कुछ बंदिशों ने मुझे भी जकड़ रखा है
में तो सूख ही रहा हूं,
घर में तुलसी पौधा भी सूख जाता है।
चली भी आओ कि अब रहा नहीं जाता है
साहस तो बहुत है पर....
सांसों से इस कदर हो गई है शिकायत
कि तुम्हारी रूह का जिक्र आता है
मैने तो दिल से चाहा है तुम्हें
फिर ये दिल किधर जाता है।
चली भी आओ कि अब रहा नहीं जाता है
साहस तो बहुत है पर....
बेतकल्लुफ़ सहम सा गया है
अब वो बात ना रही इसमें
गौर से सुना है ये लोगों की बातों में कहा जाता है।
चली भी आओ कि अब रहा नहीं जाता है
साहस तो बहुत है पर कहा नहीं जाता है।
By Rathod Aakash

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