घबराहट
Updated: Jul 16, 2025
By Chinmay Kakade
रात भर सोता नहीं पर पलकों से बस आंसू की चादर जरूर ओढ़ता हूं
घबराहट होती है कुछ अजीब सी, उसकी वजह भी शायद में ही हूं
हादसे तो होते रहते हैं रोज़ मार्रा, कुछ तो ऐसा हुआ होगा जो ना काबिल तोज़ी
हो
वर्ना इतना भी बे-ताक़त नहीं कि एक-आद हदसे से ना सवारना मुश्किल हो
तन्हाई साथ तो छोड़ती नहीं पर बातें भी कहां करती हैं
ये रुख के अरीज़ भी रो कर रुखे पड़े हैं, पर कोई शक्स देखने के लिए राजी नहीं
घबराहट होती है कि आंखें बंद करते ही मर तो ना जाऊंगा
पर खौफ़ मरने का कहा, खौफ वापस इसी आलम में वही जीवन गुजारना है
By Chinmay Kakade

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