गिनती
- Hashtag Kalakar
- Dec 12, 2025
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By Anjali Kumari
चलो करते चलो गिनती कि कुछ गिनना ज़रूरी है;
ख़ुशी-ओ-ग़म के बीचों-बीच में चलना ज़रूरी है।
अगर तुम देखो तो इक पन्ना सुखसागर के जैसा है;
तो फिर दुख से भी तो इक पन्ने का भरना ज़रूरी है।
चलो अब खोलते हैं एक बचपन का हसीं पन्ना;
जहाँ की गिनती केवल मुस्कुराहट में ही होती थी।
पिता की पीठ पर यूँ बैठ सब कुछ भूल जाती थी;
वहीं माता की गोदी में नए सपने पिरोती थी।
कि देखो आता है जीवन का अब वो उलझा अफ़साना;
जहाँ पर दुख-ओ-सुख की गिनती इक ही साथ चलती है।
कभी आँधी ही आती है महज़ तकलीफ़ की हमदम;
कभी चाहत के आँसू, वर्षा की बूंदों सी हँसती है।
कि आख़िर में बुढ़ापे का पुराना इक वह पन्ना जो;
समेटे है हज़ारों हार, लाखों भार जीवन का।
उसी पन्ने के आधे भाग में कुछ और है लिक्खा;
लिखा, क्या दिन जवानी थे, क्या सुंदर दिन था बचपन का।
यहीं तक आते-आते खेल पूरा होता जीवन का;
कभी सुख घटता बढ़ता है, कभी दुख बढ़ता घटता है।
जो तुम सोचो कभी ये हो कि सुख ही सुख हो जीवन में;
तो सोचो अहमियत क्या इसका जीवन में ही बचता है।
By Anjali Kumari

A thoughtful and creative portrayal of life's stages
❤️❤️
wow
Amazing 😍
❤️❤️❤️👌