गांधीजी के तीन बंदर
Updated: Jul 21, 2025
By Mahendra Dhirajlal Kamdar
एक बच्चे ने भोलपन में गांधीजी के बंदरों से पूछा,
आपने अपने आँख, कान और मुँह क्यूँ बंद किये हैं,
सच मानो के नहीं, खिलौनेमें से तीन आवाज़ें आईं,
बुरा मत देखो,
बुरा मत सूनो,
बुरा मत बोलो,
बच्चे को आनंद आया तो और एक प्रश्न पूछ बैठा,
सच का ये शब्द पढ़ाते हैं, मुझे उसका अर्थ बताओ,
सच मानो, फिर से खिलौनेमें से तीन आवाज़ें आईं,
सच मत देखो,
सच मत सूनो,
सच मत बोलो,
बच्चे को और आनंद आया तो और एक प्रश्न पूछा,
जूठ का ये शब्द पढ़ाते है, मुझे उसका अर्थ बताओ,
जूठ न मानो, खिलौनेमें से तीन आवाज़ें फिर से आईं,
जूठ मत देखो,
जूठ मत सूनो,
जूठ मत बोलो,
अब बच्चा असमंजस में पड़ गया, तो ये खेल देखकर
एक बुज़ुर्गने प्रश्न किया, आधा सच का अर्थ बताओ,
मानो मेरा, अब खिलौनेमें से कोई आवाज़ें नहीं आईं,
मगर बच्चा और बुज़ुर्ग दोनों देखकर परेशान रहे गएँ,
कि
पहले बंदर ने आँख से हाथ हटाकर हाथ जोड़ लिए,
दूसरे बंदर ने कान से हाथ हटाकर हाथ जोड़ लिए,
तीसरे बंदर ने मुँह से हाथ हटाकर हाथ जोड़ लिए,
अब बुज़ुर्ग तो समज चुके की यही है माहौल आजका,
बच्चा, बोलता और चलता खिलौना, ले कर चल दिया.
यहाँ ना सचकी बीमारी का है चारा ना जूठ का तीमारदार है,
यहाँ तो जूठ को सच के कपड़े पहनानेवाला ही मालदार है.
By Mahendra Dhirajlal Kamdar

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