गांधी - एक विचारधारा
Updated: Jul 28, 2025
By Geetanjali Mehra
गांधी एक मूरत नहीं
झलकती हुई कोई सूरत नहीं,
गांधी एक व्यक्तित्व की ज़रूरत है I
गांधी एक सितारा नहीं,
शब्दों के मेल का कोई नारा नहीं,
गांधी एक विचारधारा है I
गांधी सोच की गागर नहीं,
कुछ ख्यालों की चादर नहीं,
गांधी विचारों का सागर है I
गांधी लाठी में , चश्मे में , चरखे में नहीं,
अक्षरों से सम्मलहित किताबों में नहीं,
गांधी इन सब की परछाई में है I
ढूंढते हो गांधी को तो खुद में ढूंढो ,
गांधी अहिंसा की हवा है
मानवता की लहर है, स्वदेशी के झोंकों की आंधी है
वो एक प्रतिमा नहीं, सूरत नहीं, इन विचारों का नाम ही गांधी है I
इन विचारों का नाम ही गांधी है I
मैंने गांधी को देखा
मैंने गांधी को पहचाना,
उनके विचार ही हैं नई पीढ़ी को सद्भावना का खजाना,
हां मैं भी गांधी हूं……..
मैंने गांधी को सुना,
सदा उन हो ने है माना,
मानवता के पथ पर, अग्रसर हो ये जमाना,
हां मैं भी गांधी हूं….
मैंने गांधी को पढ़ा
, ये उनकी ही विचार धारा
अपना काम स्वयं करें
सामाजिक न्याय ने पुकारा
हां मैं भी गांधी हूं…..
गांधी को समझते हुए
दुनिया ने ये जाना
आत्मनिर्भरता चाहते हो तो स्वदेशी ही अपनाना
हां मैं भी गांधी हूं…….
मैंने गांधी को पढ़ा मैंने गांधी को जाना
दुनिया में कोई छोटा बड़ा
किसी उंच नीच को उन्होने नहीं माना
हां मैं भी गांधी हूं……….
बड़ी बड़ी बातें करता जग ये डर गया सारा
मुट्ठी भर नमक ने जब ताकत को ललकारा
इन विचारों के बल का है जगत में पसारा,
भविष्य में सदा चमकता रहेगा ये सितारा
हां मैं भी गांधी हूं……..
इसी विचारधारा की नीव पर देश ने शांति की लकीर साधि है
इन्ही विचारो की नीव पर राजघाट की समाधि है
क्योंकि ….वो कोई प्रतिमा नहीं , पर स्वदेशी के झोंको की आँधी है
सूरत नहीं, मूरत नहीं,
, इन विचारों का नाम ही गांधी है I
इन विचारों का नाम ही गांधी है
इन विचारों का नाम ही गांधी है
हां मैं भी गांधी हूं………
By Geetanjali Mehra

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