गंगा अवतरण
By Ananth
व्याकुलता को त्यागो, भगीरथ, गंगा जी आने ही को है
साहस ना तुम छोड़ो, भगीरथ, गंगा जी आने ही को है
इसमें कोई संदेह नहीं, योगी तुम सर्वोत्तम ही हो
पर उत्तमता पर्याप्त नहीं, आवश्यक है दृढ़ता भी हो
बस एक तपस से कुछ न हुआ, तुमसे बेहतर किसने जाना
आयु भर है संघर्ष अगर गंगा को पृथ्वी पर लाना
ना था कल्पित, संकल्प किया, अब साधोगे मन में जो है
बस धीरज तुम रक्खो, भगीरथ, गंगा जी आने ही को है
रचना करता तो झुक ही गए साधारण मानव के आगे
तांडव नर्तक भी हिल ही गए आतुर अनुरोधों को सुनके
किंतु शक्ति चिर दृढ़ निश्चय की भी ना अंतिम शक्ति है
निर्धाररित क्षण हर घटना का है जिसपर ही वह घटती है
गंगा जी के अवतरण का भी निश्चित ही क्षण कोई तो है
उस पल को तुम ठहरो, भगीरथ, गंगा जी आने ही को है।
By Ananth

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