ख्वाब
Updated: Oct 10, 2022
By Sakshi Begwani
दुनिया की इस भाग दौड़ में
तन्हाई यूं जकड़ती है
हकीकत से कोसो दूर
उसकी यादों में रहती है
अरसे कई बीत गए
उन निगाहों को देखे हुए
पर इस भीड़ में भी
उन आंखों की तलाश रहती है
उसका मुझसे मिलना
तकदीर की लिखाई लगती है
और मिलकर भी ना मिलपाना
ये याद कितनी कड़वी है
ये दुनिया जैसे आसमान
और वो तारों के बीच
चांद जैसे रहता है
मारे ख्वाबों कि दुनिया का
वो इकलौता शहजादा है
By Sakshi Begwani

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