खो गई
By Mridul Krishna Tripathi
उसकी आंखें देख समंदर शर्माएं
होठों में जैसे गुलाब समाए
बाल लंबी….. लताओं जैसे
जब नहीं तब उलझाए।
इस होली ठंडाई नहीं पीयी
सोचा उसके गाल चूमूंगा
भूल गया नशा वो भी करती है
खो गई कहीं
खुद नशे में हूं
उसे कहां खोजूंगा।।
By Mridul Krishna Tripathi

Nice work,