खूबसूरत राहें
By Keyur Joshi
यही खूबसूरत राहें ले जाएँगी कल घर मुझे,
ज़िंदगी यही है, ख्वाब ऐसेही टूट जाते है...
इन रास्तों पर मुसाफिरों की कमी नही जनाब
ये मील पत्थर है जो खत्म हो जाते है...
यूँ तो फितरत ठीक है जदीद राहें खोजने की,
गिला ये है के लोग पुराने मोड़ भूल जाते है...
माना के नजाद मिलता है सीधे रास्तों पर हमें,
किसी मोड़ में गर फ़ैज़ हो तो हम भी मुड़ जाते है...
सफ़र से मुब्तला हो जाते है कुछ रहबर इस तरह,
कैद से निकलते है फिर कैद हो जाते है...
ये कैसा तिलिस्म है बेहतर बनने की ज़िद में,
जिस मोड़ पर फिसलते है उसी मोड़ से जाते है...
तुम मंज़िलों का तककुब् जारी रखना ‘सिफ़र’,
लोग कहते है, कहकर चले जाते है...
By Keyur Joshi

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