खुद से बातचीत
By Banarasi
मैं बैठा रहा खुद से बाते करते
अपना सिर ले हांथ।९।
काटा मैने खुद से खुद को
ले कटार अपने हांथ।२।
बस चंद ख्वाबों के खातिर
छोड़ दिया खुद का साथ।३।
मुस्कान खोई पहचान खोई
ना रहा खुद का साथ।४।
मैं खुद ही खुद को समझा रहा
मत छोड़ो अभी ये साथ।५।
अभी तो सफर शुरू हुआ
मत करो खुद पे घात।६।
ना कोई तेरे पास रहा
मत छोड़ो ये साथ।७।
तुम हो मैं हूं
हम दोनो ही साथ।८।
आओ मिलकर लड़े समर्थ से
होकर दोनो एक साथ।९।
हम दोनो ही अधूरे
जब तक न हो दोनो का साथ।१०।
विकास का सहारा निश्चय से
निश्चय की करो बात।११।
व्यर्थ ही क्यों तुम उदास बैठे
करो नए कल की शुरुआत।१२।
आनंदित हो उड़ो गगन में
ले कलम के पंखों का साथ।१३।
नाप दो तुम ये धरती और अंबर
रखो खुद पे विश्वास।१४।
जब हो विचलित कभी जीवन में
तो बस रखना बात ये साथ।१५।
जब बना (खुद) से रसी ( जीवन का सार) मिले
तभी बनारसी होगा साथ।१६।
चल पड़ा बनारसी ख्यालों में
ले अपने हांथों का साथ।१७।
बदलाव ही पहचान हमारी
बस लिखते रहो दिन रात।१८।
By Banarasi

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