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खुद से कर ले प्यार

Dec 5, 2025
2 min read

By Vijeta


बहुत सारे रिश्ते और ज़िम्मेदारी निभाती है नारी

नारी तू कितनी है प्यारी

रिश्ता एक बेटी का

पूरा करे माँ बाप का सपना

रिश्ता एक दोस्त का

जरूरत में साथ खड़ी रहना फ़र्ज़ समझती है अपना

रिश्ता एक बहन का

हर जीवन के संघर्ष में है साथ रहना

रिश्ता एक पत्नी का

बन जाती है हमसफ़र लिखती है नया सफ़रनामा

रिश्ता एक माँ का

न्यौछावर करती प्रेम और पूरी ममता

बच्चों के सपनों को ही माने अपना सपना

ज़िंदगी के सफ़र में क्या तुम कुछ भूल गई

अपने लिए जीना अपनी पह्चान भूल गई

सीखो उस वृक्ष से जो डटा खड़ा है

जड़ें मज़बूत है पूरा वृक्ष हरा भरा है

जड़ों को ज़रूरत है अच्छे पोषण और पानी की


देता वृक्ष है छांव और आराम हर चलते प्राणी को

सोचो हे नारी उस वृक्ष की है तू जड़

परिवार रूपी वृक्ष पर है पूरी तेरी पकड़

अगर तू कमज़ोर हो गई

क्या टिक पाएगा ये परिवार

कुछ ही क्षणों में टूट जाएगा वृक्ष बिखर जाएगा सबका संसार

न समझ ख़ुद को कमज़ोर इतना

तू क्यूँ इस जहाँ में खो गई

ज़रा देख एक नजर ख़ुद को

या दशा ये तेरी हो गई

तू ख़ुश है तो दे पाएंगी ये खुशियाँ सबको

तू मज़बूत है तो जोड़ पाएगी सब रिश्तों को

सब को खाने में क्या पसंद है ये ध्यान रखती हो

आने वाले मेहमान को क्या पसंद है वो तैयार रखती हो

सोचा है अपने बारे में कभी क्या पसंद है

बनाऊ आज खाने में जो मुझे पसंद है

अपनी खाने का और सेहत का रखो ध्यान

मन बलवान तो सब चीज़ का संतुलन हो जाएगा आसान

सबमे खुशियाँ और सम्मान बाँट पाओगी

जब ख़ुद को इन सब में भरपूर पाओगी

अपने आपको इस भीड़ में भी देख पाओगी अपनी पहचान

और ख़ुद को स्वतन्त्र पाओगी…


By Vijeta

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