खुद से एक मुलाकात की जाए
By Prachi
क्यूँ न आज खुद से एक मुलाक़ात की जाए
पता नहीं चलते-चलते कहाँ से कहाँ आ गए,
दुनिया के रंग में ढलते-ढलते क्या से क्या हो गए।
पता ही नहीं चला कि हम कब और कहाँ खो गए।
तो सोचा आज वक़्त निकाल कर,
खुद से खुद का पता पूछ लूँ।
बहुत प्यार लुटा लिया इस दुनिया पर,
क्यों न आज खुद से ही मोहब्बत कर लूँ।
यू तो कई तस्वीर बनाई हैं इन आँखों में,
क्यों न आज खुद को इन आँखों में भर लूँ।
दुनिया को छोड़,
आज खुद से ही मुलाक़ात कर लूँ।
जग पर न लुटा कर खुद पर ही प्यार वार लूँ,
आईने के सामने खुद को निहार लूँ।
कि जल जाए दुनिया ऐसे खुद को मैं संवार लूँ।
अब भीड़ में नहीं मिल पाई तो क्या हुआ,
बंद कमरे में मैं खुद की ही तलाश कर लूँ।
क्यों न आज मैं,
खुद से ही एक मुलाक़ात कर लूँ।
क्यों न आज खुद से ही एक मुलाक़ात कर लूँ।
By Prachi

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Waah.. ✨ ⭐
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