खिड़की
By Anushka Singh
हर खिड़की की अपनी ही एक कहानी होती है |
मगर दूसरो के दर्द देखकर वो अपना गम भूल जाती है |
उसने पुकारा और हम चले आये, देखकर औरो के घरों के खेल हम भी मुस्काये |
क्यूँ भूल गए हम उन लम्हो को जब उसने ऐसे ही कईयों को पुकारा था |
दर्दो की नूमायिष् बना औरों को खरीदार बताया था |
हर खिड़की ने छुपाई कई कहानी होती है |
ज़रा गौर से देखो कई बार वो तुम्हारी ही कुछ पुरानी होती है |
By Anushka Singh

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