खामोशी से चाहतों को बताना
By Purnima Raj
नजरे झुका कर देखा तुम्हें
बातों ही बातों में बात किया
तलाश थी तेरी पहचान की
तो दिखे हर रोज दफा
आज माया इस नजरों ने
इन चाहतों का था
तुझ पर भी असर
खामोशी से इन
चाहतों को बताना
इश्क यही है एहसास था करवाना
सागर जैसा वो लहराता है
अपनी ही धुन में बहता जाता है
बेजुबान होके मैं मुस्काइ
सितारा बनके तेरे सामने आई
क्या यह धुन को समझ पाया
अपनी ख्यालों से रूबरू हो पाया
मुस्का कर हां हां कह पाया
खामोश सा इन
चाहतों को समझ पाया
इश्क यही है एहसास कर पाया
By Purnima Raj

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