खामोशी…
- Hashtag Kalakar
- Dec 10, 2025
- 1 min read
By Pragati Dandriyal
मौन इन अधरों से खामोशी व्याकुल हो झाँक रही है
कौन हमदर्द इन नयनों का अश्रुओं से माप रही है
खोज नकाब पहने इन चेहरों में उसे किसी बेनकाब की है!
खैर, दस्तूर इस दुनिया का वो धीरे-धीरे जान रही है
व्याकुल, विचलित, व्यथित वो, वो भी सन्नाटा माँग रही है,
बोलती तो कुछ नहीं पर हाँ बहुत कुछ ताक रही है
यूँ तो सब बहुत शांत सा प्रतीत होता है परंतु,
अशांत आवाज़ अपनी, अपने भीतर के शोर से वो आँक रही है
By Pragati Dandriyal

lovely👍
Very nice 😀
Nice🙌
शानदार ✨
Nice