खामोशी
Dr. Tripti Mittal
दिल में तूफान लबों पर खामोशी बसर क्यों हैं
ये सवालों की लहरें पहर दर पहर उठती क्यों है
छूती है जो हर बार जवाबों के अक्स को
अगले पल फिर हताश लोटती क्यों है
ये कौन सा मरासिम बुन रहा तूफां से खामोशी का
देखने वाला हर शख्स मदहोश सा क्यों है
Dr. Tripti Mittal

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