खामोश मुस्कान
By Vikas Rajoriya
खामोश सी निकल पड़ी है वो निदाघ हवाये ,
कोई कहता है लू उसे मै कहता मेरी साँसे उसे,
करवटे बदल रहा है सूरज दिन चढ़े आजकल ,
है नहीं आराम अब रातो में भी उसे
चांद की नरमी बीते दिनों की बाते हो गयी है,
तन्हा रहना अब शायद आदत हो गयी है
तारो की छायों तो एक पहेली है
सुलझा उसको पाना गैरत पुरानी हो गयी है
याद करते है उन यारो को सुबह शाम
रहना जिनके साथ जिंदगी की निशानी हो गयी है
मिलने की एक चाह साथ बिताने को एक पल को तरस रहे
बिना जिनके जिंदगी बेमानी हो गयी है
ऐ बैरंग काली सफ़ेद जिंदगी, भर दे रंग मिला दे यारो से
बिना उनके अब आँखें भी पानी पानी हो रही है
By Vikas Rajoriya

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