ख़्वाब
By Vikas Kumar
धुएं के बदले हाथों में फ़िर से हो तेरी हीं किताब।
काश कि हकीक़त बन जाए फिर वो तेरा ख़्वाब।
तेरे दिल में मिले मेरे रूह को फ़िर ठिकाना कोई।
मुझसे मिलने का ढूंढो फ़िर से तुम बहाना कोई।
ना आज है ना ही क़ल थी इस दिल में कोई वासना।
ताउम्र हर एक पल कायम रहे ये चाहतों का आसना।
तेरी उंगलियां मेरी उंगलियों से फ़िर हो एकाकार।
तेरी सांसे मेरी सांसों से फ़िर करे वो मीठी तकरार।
तेरी दामन मेरे हाथों में हो फ़िर से उतने ही पास।
तेरी अधरों के शबनम से पूरी हो मेरे लबों की प्यास।
सोया रहूं फ़िर रातभर तेरी जुल्फों के तले।
खोया रहूं तेरी सांसों में इस दुनिया से परे।
इस प्यार की कोई नई दुनिया बसाए हम।
जमाने के सारे गमों को वहीं भुलाए हम।
धुएं के बदले हाथों में फ़िर से हो तेरी हीं किताब।
काश कि हकीक़त बन जाए फिर वो तेरा ख़्वाब।
प्रखर प्रेम से जब सज्जित हो ये यौवन
फ़िर राष्ट्रहित में अर्पित करे हम ये जीवन
प्रशासन में शुचिता के नए कीर्तिमान बनाए
राष्ट्र को विकास के अग्रिम पंक्ति में पहुंचाए
जनता को अच्छे से समझाएं उनके अधिकार
फ़िर कर्तव्यों से भी कराएं उनका साक्षात्कार
इतनी काबिल हो जाए जो हमारी जनता एक बार
गुमराह उन्हें ना कर सकेगी फ़िर कोई भी हो सरकार
धुएं के बदले हाथों में फ़िर से हो तेरी हीं किताब
काश कि हकीक़त बन जाए फिर वो तेरा ख़्वाब
By Vikas Kumar

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