ख़ुदा नज़र आ गए…………
Updated: Sep 21, 2022
By Vishal chaudhary
छोड़ दी थी गलियाँ, फिर क्यूँ इस रहगुज़र आ गए
इबादत में तेरी मशगूल, जाने कौन ख़ुदा नज़र आ गए ।।
सजदा तेरा महफ़िल में कर, हम तो बाहर आ गए
दफ़्न अंदर ग़म-ए-जज़्बात, वो भी बाहर आ गए ।।
हुस्ने-ए-दीदार करा यूँ, लाखों क़हर ढ़ा गए
बचते बचाते हम ना जाने, कौन से शहर आ गए ।।
क्या ख़ता हुई कि जो, अब दूरियों के पहर छा गए
नींद ना मिली रात को, जाने कब शुआ-ए-सहर आ गए ।।
By Vishal chaudhary

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