ख़ुद से मिलना था मुझे, सो दर पे तेरे आया हूँ (ग़ज़ल)
By Ananth
ख़ुद से मिलना था मुझे, सो दर पे तेरे आया हूँ
आइने तेरी वफ़ा मैं आज़माने आया हूँ।
वो भी कुछ मस्ती में ख़ुद को आइने में तक रहा
मैं भी दो पल नक़्ल करने अक्स बनके आया हूँ।
तू भी पीके इसको दोहरा, ज़मज़मा ये ख़ूब है
ना कहीं को जा रहा हूँ, ना कहीं से आया हूँ।
इतने भी रहम-ओ-करम फ़रमा ना मुझपर, चारागर
कौनसा मैं वाक़ई में ठीक होने आया हूँ।
क्या हुआ जो बे-तहाशा दाद देते हो मुझे
मैं क्या कोई शायरी याँ पेश करने आया हूँ।
By Ananth

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