ख़याल
- Hashtag Kalakar
- Dec 18, 2025
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By Mandeep Kaur
बैठे-बैठे एक ख़याल आया कि ख़याल का होना ज़रूरी तो नहीं इस ज़िंदगी में। अगर यह ख़याल न हो तो हम जीएँ
खुलकर, बस इस पल में।
किसी को ख़याल है गुज़र गए वक़्त का, कोई सोचकर है परेशान कि क्या होगा आने वाले कल में। हैरानी की बात है कि
कैसे इस ख़याल-ख़याल में लोग बिता देते हैं सारी ज़िंदगी, बस भूल जाते हैं जीना अब में और इस पल में।
By Mandeep Kaur

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