ख़त लिखने कलम उठा लेते है मगर किसे ख़त लिखे, कोई पता ही नहीं मिलता
By Aayu Sharma
ख़त लिखने कलम उठा लेते है मगर किसे ख़त लिखे, कोई पता नहीं मिलता
दुआ मांगने हाथ उठा लेते है, मगर किस से दुआ मांगे कोई ख़ुदा नहीं मिलता
निकल जाते है हर रोज़ ग़ैरत बेच के इज़्ज़त कमाने
लौटते तो है एक मकान में मगर वहां कोई घर नहीं मिलता
चल रहे है भरके अंदर कई सियाह राज़
असरार खुदसे ही खुल जाए ऐसा एक हमराज़ नहीं मिलता
दोस्त तो बोहोत है ज़िन्दगी में वक़्त बिताने के लिए
बिन शराब जिनसे बात हो सके ऐसा एक यार नहीं मिलता
भीड़ में दौड़ते हुए खुदमे इतना मशरूफ हो गए
की इंसानो की इस दुनिया में इंसान नहीं मिलता
By Aayu Sharma

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