क्रिसमस
By Abha Vishwakarma
सुनो संता !
बच्चे इंराज़ार कर रहे हैं
अधीरता और आतुरता से तुम्हारा
इस क्रिसमस पर
क्योंकि
एक उन्होनें सूची बना कर
भेज दी थी तुम्हें उपहारों की
कुछ महीने दिसंबर से पूर्व.
उन्हें उम्मीद और विश्वास है
अपनी पीठ पर लाल झोला लटकाये
तुम मध्य रात्रि में
चुपके से उनके घर आकर
क्रिसमस ट्री पर लटके
रंग - बिरंगे स्टॉकिंग्स को
तोहफों और उपहारों से भर दोगे
जिनका विवरण सूची- पत्र में
लिख भेजा था बच्चों ने.
मैं पढ़ देती हूँ
क्या - क्या उम्मीदें हैं उनकी
आने वाले नए वर्ष के लिए संता
बहुत साधारण और सरल है
बच्चों की मांगे
तुम पूरी कर देना
और लौटा देना-
छोटे - छोटे बच्चों के
चेहरों की उल्लास और खुशी
क्यों कि मेरे बच्चों ने
दो वर्षों से
स्कूल- बैग, टिफिन और वाटर बॉटल
कंधों पर लटका कर
स्कूल का परिसर नहीं देखा है
तथा
स्वच्छ हवा और नीले आकाश के नीचे
खेलना, कूदना और दौड़ना
दूभर हो गया है बच्चों लिए.
मेरे बच्चे
जिंगल बेल्स, मेर्री क्रिसमस
एंड हैप्पी न्यू ईयर
गाना चाहते हैं संता
और उत्सव मनाना चाहते हैं
तुम्हारे साथ
तुम उनके क्रिसमस गिफ्ट्स
ला रहे हो न संता !
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By Abha Vishwakarma

❣️❣️
Nicely done
Such an impactful one❣️
Good one Maam
Christmas is special and so are your words in poem.