क्यों..??
By Shobhana Thakur
मुझे "बेटा" कहकर क्यों बुलाते हो..?
क्या "बेटा" शब्द ज़्यादा सम्मानित है — ये समझाते हो..?
फिर क्यों मुझे "बेटा" कहकर बुलाते हो..?
"बेटी" शब्द पूर्ण है अपने आप में,
आधा हिस्सा है धरती से लेकर आकाश में।
"बेटी नहीं, तुम तो बेटा हो"..!
क्यों निकालते हो ये बात हर बार अपने मुख से हो..?
कभी बेटे को "बेटी" कहकर बुलाते हो..?
फिर क्यों मुझे "बेटा" कहकर बुलाते हो..?
आप गौरवान्वित होते हो यह कहकर — "बेटी नहीं, बेटा है तू!"
पर मैं आहत होती हूँ, जब मेरे अस्तित्व से मुझे अलग करते हो तुम।
क्या ये सच में दुलार है, या खुद को संतुष्ट करते हो..?
कभी माँ को "बाबूजी" कहकर बुलाते हो..?
फिर क्यों मुझे "बेटा" कहकर बुलाते हो..?
नहीं खुश होती हूँ मैं, अंदर ही अंदर घुटती हूँ मैं..!
प्यार तो बेटी में भी है, फिर क्यों "बेटा" कहलाती हूँ मैं..!
"बेटी" कह लो, "गुड़िया" कह लो, "परी" कह लो..!
कितने नाम हैं — उनमें से कोई भी चुन लो..!
सृष्टि की इस अद्भुत रचना को क्यों भुलाते हो..?
मैं "बेटी" हूँ, मुझे क्यों नहीं स्वीकारते हो..?
फिर मुझे क्यों "बेटा" कहकर बुलाते हो..?
मुझे क्यों "बेटा" कहकर बुलाते हो..?
By Shobhana Thakur

Wah👌🏻👌🏻
Beautiful Creativity...Amazing!!!!♥️
Nice one
Superb
Touching the core of the heart