क्यों
By Shivali
क्यों कुछ यादों का एहसास कभी खत्म नहीं होता
भूल जाए हम उस अहम इंसान को जै हमें ग्वारा क्यों नही होता
मैं इश्क में नही हूं उनके पर पहली मोहब्ब्त का खुमार क्यों नही मिटता,
बो अनजान है जा अनजान बने रहते है
इस बात का कभी जीकर नही होता
बात होती है कभी कभी उनसे पर उसमे इश्क का इजहार नही होता,
हां नही है मुझे इश्क उनसे
पर क्यों जै मेरा दिल इस बात की गवाही नही भरता
बो मेरा नही है फिर भी यह दिल उनकी आस में क्यों है रहता ,
मैं चाहती हूं उनका नाम अपनी जिंदगी से हटाना
पर उनका जिक्र कहीं न कहीं मेरे दिल को उन्हें भूलने क्यों नही देता
उनकी यादों का सिलसिला मेरे दिल से क्यों नही मिटता,
इसे मैं एक तरफा इश्क मान कर च्लू
जा मुझे इश्क नही है उनसे पर पहली मोहब्बत का खुमार समजू
क्यों उनका चेहरा मेरे ख्वाबों से दूर नही होता,
मेरी जिंदगी का वो हिस्सा खत्म क्यों नहीं होता
उनकी गली से गुजरते वक्त जै दिल क्यों उन्हें ढूंढे लगता
मैं इश्क में नही हूं उनके पर जे पहली मुहब्बत का खुमार क्यों नही मिटता!
By Shivali

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