क्यों
By Himani Bhardwaj
क्यों पढ़ती हूँ वो जो छुपा है आँखों मैं तेरी
क्यों महसूस करती हूँ जो छुपा है बातों में तेरी
क्यों मेरे होंठों पे खिलती है मुस्कान तेरी
क्यों मेरे माथे पे पड़ती है शिकन तेरी
आज अधूरी क्यों है मुस्कान तेरी
एहसासो की दास्तान क्यों है अधूरी
जिस चमक से रोशन है जहाँ मेरा
क्यों खोयी है उन आँखों की चमक सुनहरी
जो दिल तक पौहञ्चति थी आवाज़
वो आवाज़ आज घूम क्यों है
इन धड़कनो का साज़ चुप क्यों है
तेरी राहतो का कारवाँ थमा क्यों है
By Himani Bhardw

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