क्या से क्या हो गए हैं
By Vijay Kumar Nagar
जब से आप मेरे बगल गीर हो गए हैं
मुक़द्दर मेरे तब-से आलम गीर हो गए हैं.
हम किनार हुए हैं जब से मेरे हमदम
दर किनार रिश्ते. ज़माने के सारे हो गए हैं.
यूं तो खैर मकदम करते थे. सभी गुलों से उनका
चमन के सारे खार आज. उनके नदीम हो गए हैं.
तबस्सुम को किसी की. तड़पता था दिल मेरा
खिलखिलाते हुए वह दर पर मेरे. नमूदार हो गए हैं.
तख्ते ताऊस पर काबिज थे हिंदुस्तान में सदियों से
दो गज ज़मीन से कू ए यार की वो. महरूम हो गए हैं.
तामीर करवाना चाहते थे. मकबरे अपनी मैयत पर
मिस मार कब्र पर से नाम उनके. गुम हो गए हैं.
सोया करते थे जो. बेहिसाब दौलत के गद्दों पर
सुना है आज वह पाई-पाई को. मोहताज हो गए हैं.
नापा करते थे रिश्तों को. लफ्जों की फ़ौज से
पुकार पर अपनों की. वह बहरे हो गए हैं.
रिहाइश थी जिनकी. बीस यों कमरों के आसमानी महल में
एक कोठरी में वह आज. रहने को मजबूर हो गए हैं.
नाम दर्ज है जिनके. कई विक्रम अर्श पर उड़ने के
फर्श पर पैदल चलने को. आज मजबूर हो गए हैं.
सवारी करते थे करोड़ों की गाड़ी में. पिछली सीट पर वो
झुकी गर्दन से वो. सवारी ओटो की करते हो गए हैं.
अदालतें चला करती थी. जिनकी दौलत के इशारों पर
वो हर पेशी पर हाज़िर होने को. पा बन्द हो गए हैं.
नींद नहीं आती थी रात भर. डंलोपिलो के नर्म गद्दों पर
चोकीदारी छोड़ दौलत की. चटाई पर सोते हो गए हैं.
कभी ना उठाया था. ज़िन्दगी में गिलास पानी का
पब्लिक नल से भर बाल्टी. पानी लाते हो गए हैं.
कसीदे छपा करते थे. अखबारों में शान में उनके
वो तन्हा कमरे में. मरसिया गाते हो गए हैं.
वीराने में जा बसे थे हम. इश्क़ में 'नाकाम' होकर
बिरादर सारे उनके. आज मेरे तलबगार हो गए हैं.
By Vijay Kumar Nagar

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