क्या चाहता है तू
By Amit Kumar
क्यूँ आया है तू पूछ अपने आप से
उठा जागा भागा सोया, बस इतना ही
ना बिल्कुल नही, अब उठ, सच मे जाग सच मे भाग
आंखे खोल, जीवन तोल, मन से बोल,
टकरा अब मुश्किलों से मुह के बल
खून बहा, पसीना बहा, जब तक जान है जब तक निशान है
खुद के लिए क्या जीता है खुद के लिए मरता है
सच मे तू यही चाहता है सच मे तू यही सोचता है
जमीर जगा तक़दीर उठा और चल, अब चल रुक मत पीछे मत देख
निकल अतीत के जंजाल से, बेकारी के कंकाल से
मौत की लकीर मिटा, वजूद बना, चल उठ
लहरों मे गोते लगा पहाड़ उठा
अब झांक अपने अंदर, पूछ क्या है तू, क्या चाहता है तू

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