कोरोना - कहर
By MAHAVEER SINGH TANWAR
क्या अजब बीमारी कोरोना,
दहला पृथ्वी का हर कोना।
कहीं खांसी का है आलम यह,
कहीं छींक छांक का है रोना।। 1
है तेज बुखार किसी को तो ,
किसी का है सिर भी चकराया।
कोई सांस नहीं ले पाता है तो
यह भी कोरोना की माया।। 2
निकल पड़ा जब चीन से
इधर उधर मुंह करने लगा।
अमरीका की भी सांस रुकी
इटली स्पेन भी मरने लगा।। 3
पेश फ्रांस की चली नहीं
छाती में बलगम बहुत जमा।
कई देशों को था पार किया
इतने पर भी यह नहीं थमा।। 4
कोहराम मचा पूरे जग में
नहीं तोड़ इसी का कोई पाया।
इतने देशों के लोग फंसे
भारत पर भी संकट छाया।। 5
सारे प्रांतों की सीमा में
कोरोना का ही तो रोना।
महाराष्ट्र या कर्नाटक, केरल
राजस्थान हो या गोवा।। 6
दिल्ली का दिल भी दहल गया
वहां भी कोरोना फैल गया।
बिहार, उड़ीसा और बंगाल
इनकी सड़कों से टहल गया।। 7
उत्तर, हिमाचल, मध्य प्रदेश
लद्दाख, जम्मू और कश्मीर।
हुई सभी प्रांत के लोगों की
कोरोना एक भयंकर पीर।। 8
सब मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर
इनके दरवाजे बंद हुए।
सब होटल, हॉस्टल, मॉल सभी
बंद व्यापारियों के धंध हुए।। 9
क्या स्कूल की क्या कॉलेज की,
क्या शहरों की क्या गांवों की।
क्या खेत, दुकान, बाजारों की
है एक कहानी अब सबकी।। 10
कोई अपनों से दूर हुआ
कोई घर में भी मजबूर हुआ।
सपना सबका ही चूर हुआ
कोरोना कितना क्रूर हुआ।। 11
कहीं शिक्षक घर ना जा पाया
तो खिल्लू कुछ ना खा पाया।
उसके फोनों पर फोन मिले
पापा तू क्यों ना घर आया।। 12
खाकी का खूँ भी खोल गया
लोगों को घूमते जब देखा।
उसने डंडों के वार किए
लॉकडाउन तोड़ते जब देखा।। 13
डॉक्टर ,कंपाउंडर, नर्स सभी
अपनी ड्यूटी में व्यस्त अभी।
रोगी पाएं आराम कभी
तो लेंगे यह विश्राम तभी।। 14
वाहनों का आवागमन रुका
सांसे लोगों की अटक गई।
मार्ग मुख्य सब बंद पड़े
गलियां भी अब तो भटक गई।। 15
हरियाणा, पंजाब, गुजराता
अब कहीं नहीं आता जाता।
प्रशासन चाक चौबंद है
होम आइसोलेशन करवाता।। 16
कुछ पैदल चलना शुरू हुए
कुछ की साइकिल भी दौड़ पड़ी।
कोई कंधे पर ही ले भागा
जब अपनों पर ही मौत पड़ी।। 17
सरकारें सारी चौंक पड़ीं
जनता की चीखें आने लगी।
सिंहासन सबका डोल गया
और नींदें सबकी जाने लगी।। 18
कई दानवीर आगे आए
संकेत भलाई के लाए।
उद्योगपति भी जब जागे
सबके ही मन को वे भाए।। 19
करोड़ों रुपयों को लेकर वे
पी एम केयर्स में दे आए।
कोई लाखों की कीमत को भी
सी एम खाते में दे आए।। 20
कोई सेनेटाइजर, मास्क बना
जनता के बीच में बांट रहा।
कोई कर्मचारियों के हित में
सौगात के फीते काट रहा।। 21
डॉक्टर और वैज्ञानिक सारे
वैक्सीन खोज में लगे हुए।
सरकार, प्रशासन, शिक्षक सब
कर्मचारी सारे जगे हुए।। 22
सरकार, प्रशासन और जनता
सबका है फर्ज यही बनता।
हिल मिलकर जोर लगाओ सब
कोरोना फिर क्यों नहीं भगता।। 23
सब के त्याग समर्पण से ही।
भारत को जीत मिलेगी ही।
हम सब डटकर सहयोग करें
कोरोना की नींव हिलेगी ही।। 24
हे प्रभु! हमको यह शक्ति दो
चरणों में अपने भक्ति दो।
महावीर बनें हम सब अब तो
कोरोना से हमको मुक्ति दो।। 25
*रचनाकार-*
महावीर सिंह तंवर
By MAHAVEER SINGH TANWAR

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