कोरोना 2020
By Dr. P. L. Bharati
इक्कीसवी सदी मे बनकर आई, त्रासदी भरी कोरोना है।
मानव मन के लिए बन गयी, विपदा भरी कोरोना है।।
ठाना था वायरस ने मन मे, ताज मिलेगा जीत ने,
समर्थ राष्ट्र को छोटा करने, भर ली भावना हीं ने।
श्रेष्ठ बनने की चाहत मे, कब जागे कब सोना है,
इक्कीसवी सदी मे …………….
फ्रांस, अमेरिका, स्पेन, इटली, जापान तक मे भारी है,
भारत सम सदभाव देश मे, कोरोना आकर हारी है।
सच बतलाओ वायरस तुमको, क्या पाना क्या खोना है,
इक्कीसवी सदी मे ……………..
गर महामारी से बचना चाहे, तो अनुशासन पूरी है,
संयम से मन शांत करके, रहना घर मे जरूरी है।
अपने अपनों देश के खातिर, हर पल घर मे होना है,
इक्कीसवी सदी मे ……………………….
बहुत जरूरी हो तो निकले, पंछा मास्क लगाकर ही,
सेवा स्वास्थ्य सिपाही की माने, रहना दूरी बनाकर ही।
हेंडवाश साबुन पानी से, नियमित हाथ को धोना है,
इक्कीसवी सदी मे …………………….
लख लख जन आफत से तड़फे, आना जाना बंद हुआ,
लाखो जन निर्धन हो गए, कुछ की मति भी मंद हुआ।
प्रकृति से खिलवाड़ न करना, वही काटो जो बोना है,
इक्कीसवी सदी मे बनकर आई, त्रासदी भरी कोरोना है।
By Dr. P. L. Bharati

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