कोमल हृदय था मेरा
By Abhishek Sharma
एहसासों को भर के ठेले में, धक्का नफरतों ने दे दिया
कोमल हृदय था मेरा कठोरता से भर गया
अब नहीं दिखता हर किसी में प्यार, उनके प्यार के पीछे का स्वार्थ मुझे दिख गया
अब नहीं होता हर किसी पे विश्वास क्योंकि विश्वास ही धोखा है यह मैं जान गया
अब नहीं पड़ता लोगों के मैटर में, दूसरे दिन सब एक है, में ही सबका दुश्मन बन गया
अब शांति पसंद है जीवन में इसलिए सबसे दूर हो गया
तलाश है प्यार की, एक प्यारे से साथी की, जिंदगी की कठिन राहों में, मैं अकेला ही निकल गया।
By Abhishek Sharma

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