कुछ लिखूं
By Vishal
ढूढ़ रहा था जिसे मै,
वो स्वयं मे स्वयं का जवाब हूं।।
खोजता रहा ता उम्र जिसे मै ,
मै स्वयं ही स्वयं के पास हूं।।
हर हार के बाद जो है किया ,
मै स्वयं का स्वयं मे प्रयास हू।।
हार भी हार जाए ऐसी ,
मै स्वयं की स्वयं मे वो आश हूं।।
घन अंधेरों घन घोर मे,
बस स्वयं का स्वयं मे प्रकाश हूं।।
नहीं चल रहा यूं राह में अकेले ,
डर नहीं अब मै स्वयं ही स्वयं के साथ हू।।।
हर शंका मिट सी गई है अब,
क्योंकि मै स्वयं ही स्वयं का जवाब हू।।।
मै स्वयं ही स्वयं का जवाब हू।।।।
By Vishal

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