कुछ बात अभी भी करनी है
By Alka Singh
कुछ ख्वाब अभी भी बुनने हैं
कुछ गीत अभी भी गाने हैं,
यूं हाथ छोड़कर जाओ ना
कुछ बात अभी भी करनी है।
कुछ मोती चुनकर लाने हैं
कुछ लक्ष्य अभी भी पाने हैं,
यूं पीठ मुझे दिखलाओ ना
कुछ बात अभी भी करनी है।
कुछ अंतरद्वंद हैं जीवन के
कुछ द्वेष बचे मेरे मन में,
यूं उठकर अब तुम जाओ ना
कुछ बात अभी भी करनी है।
कुछ बातें मौन अधर में हैं
कुछ सुनने की आशाएं हैं,
यूं मुझसे आंख चुराओ ना
कुछ बात अभी भी करनी है।
कुछ नए सृजन हैं बाकी अभी
कुछ आशाओं को गढ़ना है
यूं इतनी जल्दी जाओ ना
कुछ बात अभी भी करनी है।
By Alka Singh

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