कुछ न था
By Abhishek Kumar
जो खोया उसने ही खोया, वो दौलत भी, वो शोहरत भी ।
मोहब्बत मे जो मैने जिंदगी भी खोई, कुछ न था ।।
वफा जितनी की उसने की, जो थी उल्फत, उसी की थी ।
मोहब्बत के लतीफे मे दीवाना मै था, कुछ न था ।।
वो जिसके एक एक लम्हे पर थी कुर्बान एक एक उम्र,
वो एक पल मे ही कह गुजरा, हमारे बीच कुछ न था ।।
बडी मुद्दत से अपने पास जो भी था, यही तो था,
मगर ये दिल हमारा उनकी नजरो मे तो कुछ न था ।।
उन्हे पाने की राहो मे मेरी कोशिश भी कुछ न थी,
बस उनका ख्वाब मकसद था, तो क्या था, सच मे कुछ न था ।।
मै आसिम था, था मेरा इश्क बस एक आज, कुछ न था ।।
ये सुनकर भी जो मै खामोश था, था प्यार, कुछ न था ।।
By Abhishek Kumar

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