कुछ खोकर नही
By TanuShree Patwa
ये जो चेहरा दुनिया को दिखता है,
ये तो मै नही।
जैसा सब बयाँ करते हैं,
मैं वैसी तो नही।
तकदीर लिखना चाही थी,
कलम तोड़ कर तो नही।
किस्मत मोड़ना चाही थी,
ऐसे ख़ुद को तोड़कर तो नही।
ख़ुद से रूबरू होना चाहती थी,
ये जहाँ छोड़ कर तो नही।
कुछ पाना चाहती थी,
ख़ुद को खोकर तो नही।
ख़ुद को फिर से ढूँढने निकली हू,
एक बार फिर जिंदगी में लौटना चाहती हू,
पर इस बार कुछ खोकर नही।
पर इस बार कुछ खोकर नही।।
By TanuShree Patwa

Comments